"...मैं कोई पत्थर नहीं, इंसान हूँ
कैसे कह दूँ, गम से घबराता नहीं ..."
"...मुझे कोई शोक नहीं, तेरी मजार पर दीप जलाने का ,
बस इस बहाने, वहां तक का रास्ता दीख जाता है..."
"...मुझे मोहब्बत है, अपने हाथ की सब उँगलियों से
ना जाने किस उंगली को पकड़ के, 'माँ ' ने मुझे चलना सिखाया होगा ..."
"...इस से बड़ी बेबसी, और क्या होगी मेरे लिए
मेरे दर से आज फकीर, खाली हाथ लौट गया..."
"...मै ओर मेरा भगवान, दोनो एक जैसे है
रोज भूल जाते है ----
वो मेरे गुनाहो को, ओर मै उनकी मेहरबानियो को..."
"...दुश्मन में हुनर है तो, उसकी भी तारीफ करो दिल से
ना जाने कौन सी बात, जिंदगी जीना सीखा सकती है ..."
"...फूलों की तरह जब होठों पर, एक शोख तबसुम बिखरेगा
धीरे से तुम्हारे कानों में ,एक बात पुरानी कह देंगे
समझे न जिसे तुम आँखों से ,वो बात पुरानी कह देंगे
हम जिक्र करेंगे गैरों का ,और अपनी कहानी कह देंगे ...."
"...गुज़र गया वो वक़्त, जब तेरी हसरत थी मुझे,
अब तू खुदा भी बन जाये, तो भी तेरा, सजदा ना करूँ ..."
"...साफ़ कह दो, अगर गिला है कोई,
फैसला.... फांसले से बेहतर है ..."
"...किसी मासूम बच्चे के, तब्बसुम में उतर जाओ
तो शायद ये समझ पाओ, खुदा ऐसा भी होता है ... "
"...फिज़ा में फैल चली, मेरी बात की खुशबू ,
अभी तो मैंने, हवाओं से, कुछ कहा भी नहीं ..."
"...हाथ ज़ख़्मी हुए, तो कुछ अपनी ही खता थी
लकीरों को मिटाना चाहा, किसी को पाने की खातिर ..."
"...एक ही दर पे, सजदे में सर झुके, तो सुकून मिलता है ए खुदा
भटक जाते है वो लोग, जिनके हजारों खुदा होते हैं ..."
"...भूखे बच्चो की तसल्ली के लिए..
माँ ने फिर, पानी पकाया देर तक... "
"...निगाहों से क़त्ल कर डालो , न हो तकलीफ दोनों को !
तुम्हे खंजर उठाने की.................. हमे गर्दन झुकने की..."
"...ऐसा नहीं है कि, मुझमें कोई ऐब नहीं है..
पर सच कहता हूँ, मुझमे कोई फरेब नहीं है..."
"...तिशनगी जम गयी, पत्थर की तरह, होठों पर
डूब कर भी तेरे दरिया से मैं, प्यासा निकला..."
"...है शोक - ए - सफ़र ऐसा, के एक उमर से हमने
मंजिल भी ना पाई, पर रास्ता भी ना बदला..."
"...मुझे मोहब्बत है, अपने हाथ की सब उँगलियों से
ना जाने किस उंगली को पकड़ के, 'माँ ' ने मुझे चलना सिखाया होगा ..."
"...सुन कर तमाम रात, मेरी दास्तान - ए - गम
सुबह वो मुस्करा कर बोले ,बहुत बोलते हो तुम..."
"...उसकी बेवफाई पे भी फ़िदा होती है, जान अपनी
खुदा जाने, अगर उस में वफ़ा होती, तो क्या होता ..."
"...ठोकर खाकर भी ना संभले, तो मुसाफिर का नसीब
वरना पत्थर तो अपना, फर्ज निभा दिया करते है..."
"...टूट गयी उंगलियां, पत्थर तराशते तराशते
जब बनी सूरत-ए-यार, तो खरीद दार आ गए ..."
"...बच्चा बोला देखकर मस्जिद आलीशान
इक खुदा तेरे लिये, इत्ता बडा मकान..."
"...इतने बड़े शहर में, कोई मयकदा नहीं,
लगता है इस शहर में, कोई बेवफा नहीं..."
"...मोहब्बत मुझे तुमसे नहीँ, तेरे किरदार से है
वरना हँसीन लोग तो, बाजार मेँ आम मिला करते हैँ..."
"...मैं उम्र भर न कोई दे सका जवाब,
वह इक नजर में, इतने सवालात कर गये..."
"...किस को आती है मसीहाई, किसे आवाज़ दूं,
बोल ऐ ख़ूंख़ार तनहाई, किसे आवाज़ दूं,
चुप रहूं तो, हर नफ़स ड़सता है, नागन की तरह,
आह भरने में है रुसवाई, किसे आवाज़ दूं..."
"...ज़रूरी तो नहीं जो शायरी करे, उसे इश्क़ हो ,
ज़िन्दगी भी कुछ ज़ख़्म बे -मिसाल देती है ..."
"...होठों को सी के देखिये... पछताइएगा आप
हंगामे जाग उठते हैं अक्सर.... घुटन के बाद..."
"...मैंने उनसे कहा, कोई झूठ बोलो आज हमसे
वो मुस्कुराये और बोले, तुम बहुत याद आते हो ..."
"... कहते हैं कि '''पहला प्यार कभी भुलाया नहीं जाता'''
फिर पता नहीं लोग क्यूँ,,, अपने "माँ -बाप" का प्यार
भूल जाते हैं..??..."
"...सलीका हो अगर, भीगी पलकों को पढ़ने का ,
तो बहते हुए आंसू ,अकसर बात करते हैं ..."
"...बस इक इसी बात पर, अहले जमाना, खफा हे हमसे.....
लकीरें हम ज़माने से, जरा हटके बनाते हैं..."
"...बुलंदियों की ख्वाइशें तो बहुत है मगर,
दूसरों को रौंदने का हुनर कहाँ से लायें ..."
"...ऐसे हिज्र के मौसम, तब तब आते हैं,
तेरे अलावा, याद हमें सब आते हैं,
कागज़ की कस्थी में, दरिया पार किया,
देखो हम को, क्या क्या करतब आते हैं..."
"...संघर्षों मे यदि कटता है, कट जाए सारा ही जीवन
पग-पग पर समझौता करना,,, मेरे वश की बात नही है ..."
"... ज़िन्दगी तो अपने दम पर ही जी जाती हे …
दूसरो के कन्धों पर तो सिर्फ जनाजे उठाये जाते हैं ..."
"..किताबों से कभी गुजरो, तो यूँ किरदार मिलते हैं,
गए वक्तों की ड्योढ़ी में खड़े, कुछ यार मिलते हैं,
जिसे हम दिल का वीराना समझकर छोड़ आये थे,
वहाँ उजड़े हुए शहरों के, कुछ आसार मिलते हैं ..."
"...अपना अंजाम तो मालूम है सबको, फिर भी,
अपनी नज़रों में, हर इंसान, सिकंदर क्यूं है!!!..."
"...मुझसे बिछड़ के खुश रहते हो,
मेरी तरह तुम भी झूठे हो,
तुम तन्हा दुनिया से लडोगे,
बच्चों सी बातें करते हो..."
"...आप को देख कर, देखता रह गया,
क्या कहुँ, और कहने को क्या रह गया,
झूठ वाले, कहीं से कहीं बढ गये,
और मैं था, के सच बोलता रह गया..."
"...तुम्हारी अन्जुमन से उठ के, दीवाने कहाँ जाते
जो वाबिस्ता हुये तुम से ,वो अफसाने कहाँ जाते..."
"...अपना गम ले के, कही और ना जाया जाये
घर मे बिखरी हुई चीजो को, सजाया जाये
घर से मस्जिद है बहुत दुर ,चलो यू कर ले
किसी रोते हुये बच्चे को, हसँया जाये..."
"...पल भर में क्या समझोगे,
मैं सदियों में बिखरा हूँ.."
"...गुलशन कि फ़क़त फूलों से नहीं ,काटों से भी जीनत होती है,
जीने के लिए इस दुनिया में, ग़म कि भी ज़रूरत होती है.
वो पुर्सिश-ए-ग़म को आये हैं ,कुछ कह ना सकूं चुप रह ना सकूं,
खामोश रहूँ तो मुश्किल है ,कह दूं तो शिक़ायत होती है..."
"...अपनी आँखों के समंदर में, उतर जाने दे।
तेरा मुजरिम हूँ, मुझे डूब के मर जाने दे।
ज़ख़्म ,कितने तेरी चाहत से मिले हैं मुझको
सोचता हूँ कि कहूँ तुझसे, मगर जाने दे..."
"...जिन्दगी तुने लहू ले के, दिया कुछ भी नहीं,
तेरे दामन मैं मेरे वास्ते ,क्या कुछ भी नहीं,
मेरे इन हाथों की चाहो तो, तलाशी ले लो,
मेरे हाथों में लकीरों के सिवा, कुछ भी नहीं..."
"...परखना मत, परखने में कोई अपना नहीं रहता,
किसी भी आईने में, देर तक चेहरा नहीं रहता,
मोहब्बत एक खुसबू है, हमेशा साथ चलती है,
कोई इंसान तन्हाई में भी, तनहा नहीं रहता..."
"...बड़ी नाजुक है ये मंजिल, मोहब्बत का सफर है,
धड़क आहिस्ता से ए दिल, मोहब्बत का सफर है,
कोई सुन ले न ये किस्सा, बहुत डर लगता है,
मगर डरने से क्या हासिल, मोहब्बत का सफर है..."
"...गैर लगता है ना अपनों की तरह मिलता है
तू ज़माने की तरह मुझको सताता क्यूं है..??
एक मुद्दत से जहां काफ़िले गुज़रे ही नहीं
ऐसी राहों पे चिरागों को जलाता क्यूं है...???"
"...सर झुकाओगे तो पत्थर देवता हो जायेगा,
इतना मत चाहो उसे वो बेवफा हो जायेगा,
हम भी दरिया हैं ,हमे अपना हुनर मालूम है,
जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जायेगा..."
"...तुझसे मिलकर हमें रोना था, बहुत रोना था
तन्गी-ए-वक़्त-ए-मुलाक़ात ने, रोने ना दिया
रोने वालों से कह दो, उनका भी रोना रो लें
जिनको ,मजबूरी-ए-हालात ने, रोने ना दिया..."
"...सफर मे धुप तो होगी, जो चल सको तो चलो,
सभी हैं भीड़ में, तुम भी निकल सको तो चलो
यहाँ किसी को, कोई रास्ता नहीं देता,
मुझे गिरा के अगर, तुम संभल सको तो चलो..."
Courtesy: https://www.facebook.com/kgautamips?fref=ts
कैसे कह दूँ, गम से घबराता नहीं ..."
"...मुझे कोई शोक नहीं, तेरी मजार पर दीप जलाने का ,
बस इस बहाने, वहां तक का रास्ता दीख जाता है..."
"...मुझे मोहब्बत है, अपने हाथ की सब उँगलियों से
ना जाने किस उंगली को पकड़ के, 'माँ ' ने मुझे चलना सिखाया होगा ..."
"...इस से बड़ी बेबसी, और क्या होगी मेरे लिए
मेरे दर से आज फकीर, खाली हाथ लौट गया..."
"...मै ओर मेरा भगवान, दोनो एक जैसे है
रोज भूल जाते है ----
वो मेरे गुनाहो को, ओर मै उनकी मेहरबानियो को..."
"...दुश्मन में हुनर है तो, उसकी भी तारीफ करो दिल से
ना जाने कौन सी बात, जिंदगी जीना सीखा सकती है ..."
"...फूलों की तरह जब होठों पर, एक शोख तबसुम बिखरेगा
धीरे से तुम्हारे कानों में ,एक बात पुरानी कह देंगे
समझे न जिसे तुम आँखों से ,वो बात पुरानी कह देंगे
हम जिक्र करेंगे गैरों का ,और अपनी कहानी कह देंगे ...."
"...गुज़र गया वो वक़्त, जब तेरी हसरत थी मुझे,
अब तू खुदा भी बन जाये, तो भी तेरा, सजदा ना करूँ ..."
"...साफ़ कह दो, अगर गिला है कोई,
फैसला.... फांसले से बेहतर है ..."
"...किसी मासूम बच्चे के, तब्बसुम में उतर जाओ
तो शायद ये समझ पाओ, खुदा ऐसा भी होता है ... "
"...फिज़ा में फैल चली, मेरी बात की खुशबू ,
अभी तो मैंने, हवाओं से, कुछ कहा भी नहीं ..."
"...हाथ ज़ख़्मी हुए, तो कुछ अपनी ही खता थी
लकीरों को मिटाना चाहा, किसी को पाने की खातिर ..."
"...एक ही दर पे, सजदे में सर झुके, तो सुकून मिलता है ए खुदा
भटक जाते है वो लोग, जिनके हजारों खुदा होते हैं ..."
"...भूखे बच्चो की तसल्ली के लिए..
माँ ने फिर, पानी पकाया देर तक... "
"...निगाहों से क़त्ल कर डालो , न हो तकलीफ दोनों को !
तुम्हे खंजर उठाने की.................. हमे गर्दन झुकने की..."
"...ऐसा नहीं है कि, मुझमें कोई ऐब नहीं है..
पर सच कहता हूँ, मुझमे कोई फरेब नहीं है..."
"...तिशनगी जम गयी, पत्थर की तरह, होठों पर
डूब कर भी तेरे दरिया से मैं, प्यासा निकला..."
"...है शोक - ए - सफ़र ऐसा, के एक उमर से हमने
मंजिल भी ना पाई, पर रास्ता भी ना बदला..."
"...मुझे मोहब्बत है, अपने हाथ की सब उँगलियों से
ना जाने किस उंगली को पकड़ के, 'माँ ' ने मुझे चलना सिखाया होगा ..."
"...सुन कर तमाम रात, मेरी दास्तान - ए - गम
सुबह वो मुस्करा कर बोले ,बहुत बोलते हो तुम..."
"...उसकी बेवफाई पे भी फ़िदा होती है, जान अपनी
खुदा जाने, अगर उस में वफ़ा होती, तो क्या होता ..."
"...ठोकर खाकर भी ना संभले, तो मुसाफिर का नसीब
वरना पत्थर तो अपना, फर्ज निभा दिया करते है..."
"...टूट गयी उंगलियां, पत्थर तराशते तराशते
जब बनी सूरत-ए-यार, तो खरीद दार आ गए ..."
"...बच्चा बोला देखकर मस्जिद आलीशान
इक खुदा तेरे लिये, इत्ता बडा मकान..."
"...इतने बड़े शहर में, कोई मयकदा नहीं,
लगता है इस शहर में, कोई बेवफा नहीं..."
"...मोहब्बत मुझे तुमसे नहीँ, तेरे किरदार से है
वरना हँसीन लोग तो, बाजार मेँ आम मिला करते हैँ..."
"...मैं उम्र भर न कोई दे सका जवाब,
वह इक नजर में, इतने सवालात कर गये..."
"...किस को आती है मसीहाई, किसे आवाज़ दूं,
बोल ऐ ख़ूंख़ार तनहाई, किसे आवाज़ दूं,
चुप रहूं तो, हर नफ़स ड़सता है, नागन की तरह,
आह भरने में है रुसवाई, किसे आवाज़ दूं..."
"...ज़रूरी तो नहीं जो शायरी करे, उसे इश्क़ हो ,
ज़िन्दगी भी कुछ ज़ख़्म बे -मिसाल देती है ..."
"...होठों को सी के देखिये... पछताइएगा आप
हंगामे जाग उठते हैं अक्सर.... घुटन के बाद..."
"...मैंने उनसे कहा, कोई झूठ बोलो आज हमसे
वो मुस्कुराये और बोले, तुम बहुत याद आते हो ..."
"... कहते हैं कि '''पहला प्यार कभी भुलाया नहीं जाता'''
फिर पता नहीं लोग क्यूँ,,, अपने "माँ -बाप" का प्यार
भूल जाते हैं..??..."
"...सलीका हो अगर, भीगी पलकों को पढ़ने का ,
तो बहते हुए आंसू ,अकसर बात करते हैं ..."
"...बस इक इसी बात पर, अहले जमाना, खफा हे हमसे.....
लकीरें हम ज़माने से, जरा हटके बनाते हैं..."
"...बुलंदियों की ख्वाइशें तो बहुत है मगर,
दूसरों को रौंदने का हुनर कहाँ से लायें ..."
"...ऐसे हिज्र के मौसम, तब तब आते हैं,
तेरे अलावा, याद हमें सब आते हैं,
कागज़ की कस्थी में, दरिया पार किया,
देखो हम को, क्या क्या करतब आते हैं..."
"...संघर्षों मे यदि कटता है, कट जाए सारा ही जीवन
पग-पग पर समझौता करना,,, मेरे वश की बात नही है ..."
"... ज़िन्दगी तो अपने दम पर ही जी जाती हे …
दूसरो के कन्धों पर तो सिर्फ जनाजे उठाये जाते हैं ..."
"..किताबों से कभी गुजरो, तो यूँ किरदार मिलते हैं,
गए वक्तों की ड्योढ़ी में खड़े, कुछ यार मिलते हैं,
जिसे हम दिल का वीराना समझकर छोड़ आये थे,
वहाँ उजड़े हुए शहरों के, कुछ आसार मिलते हैं ..."
"...अपना अंजाम तो मालूम है सबको, फिर भी,
अपनी नज़रों में, हर इंसान, सिकंदर क्यूं है!!!..."
"...मुझसे बिछड़ के खुश रहते हो,
मेरी तरह तुम भी झूठे हो,
तुम तन्हा दुनिया से लडोगे,
बच्चों सी बातें करते हो..."
"...आप को देख कर, देखता रह गया,
क्या कहुँ, और कहने को क्या रह गया,
झूठ वाले, कहीं से कहीं बढ गये,
और मैं था, के सच बोलता रह गया..."
"...तुम्हारी अन्जुमन से उठ के, दीवाने कहाँ जाते
जो वाबिस्ता हुये तुम से ,वो अफसाने कहाँ जाते..."
"...अपना गम ले के, कही और ना जाया जाये
घर मे बिखरी हुई चीजो को, सजाया जाये
घर से मस्जिद है बहुत दुर ,चलो यू कर ले
किसी रोते हुये बच्चे को, हसँया जाये..."
"...पल भर में क्या समझोगे,
मैं सदियों में बिखरा हूँ.."
"...गुलशन कि फ़क़त फूलों से नहीं ,काटों से भी जीनत होती है,
जीने के लिए इस दुनिया में, ग़म कि भी ज़रूरत होती है.
वो पुर्सिश-ए-ग़म को आये हैं ,कुछ कह ना सकूं चुप रह ना सकूं,
खामोश रहूँ तो मुश्किल है ,कह दूं तो शिक़ायत होती है..."
"...अपनी आँखों के समंदर में, उतर जाने दे।
तेरा मुजरिम हूँ, मुझे डूब के मर जाने दे।
ज़ख़्म ,कितने तेरी चाहत से मिले हैं मुझको
सोचता हूँ कि कहूँ तुझसे, मगर जाने दे..."
"...जिन्दगी तुने लहू ले के, दिया कुछ भी नहीं,
तेरे दामन मैं मेरे वास्ते ,क्या कुछ भी नहीं,
मेरे इन हाथों की चाहो तो, तलाशी ले लो,
मेरे हाथों में लकीरों के सिवा, कुछ भी नहीं..."
"...परखना मत, परखने में कोई अपना नहीं रहता,
किसी भी आईने में, देर तक चेहरा नहीं रहता,
मोहब्बत एक खुसबू है, हमेशा साथ चलती है,
कोई इंसान तन्हाई में भी, तनहा नहीं रहता..."
"...बड़ी नाजुक है ये मंजिल, मोहब्बत का सफर है,
धड़क आहिस्ता से ए दिल, मोहब्बत का सफर है,
कोई सुन ले न ये किस्सा, बहुत डर लगता है,
मगर डरने से क्या हासिल, मोहब्बत का सफर है..."
"...गैर लगता है ना अपनों की तरह मिलता है
तू ज़माने की तरह मुझको सताता क्यूं है..??
एक मुद्दत से जहां काफ़िले गुज़रे ही नहीं
ऐसी राहों पे चिरागों को जलाता क्यूं है...???"
"...सर झुकाओगे तो पत्थर देवता हो जायेगा,
इतना मत चाहो उसे वो बेवफा हो जायेगा,
हम भी दरिया हैं ,हमे अपना हुनर मालूम है,
जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जायेगा..."
"...तुझसे मिलकर हमें रोना था, बहुत रोना था
तन्गी-ए-वक़्त-ए-मुलाक़ात ने, रोने ना दिया
रोने वालों से कह दो, उनका भी रोना रो लें
जिनको ,मजबूरी-ए-हालात ने, रोने ना दिया..."
"...सफर मे धुप तो होगी, जो चल सको तो चलो,
सभी हैं भीड़ में, तुम भी निकल सको तो चलो
यहाँ किसी को, कोई रास्ता नहीं देता,
मुझे गिरा के अगर, तुम संभल सको तो चलो..."
Courtesy: https://www.facebook.com/kgautamips?fref=ts
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